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The Men who Built India | Untold Story of Tata | Dhruv Rathee
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GER-Niveau
Schwierigkeit
Untertitel (398 Segmente)
नमस्कार दोस्तों अपनी जिंदगी के किसी भी
हिस्से को उठाकर देख लो कोई ना कोई
पावर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस आप यकीन
नहीं करोगे दोस्तों 100 से ज्यादा कंपनीज
है टाटा ग्रुप के अंदर तो कोई हैरानी की
बात नहीं है कि टाटा आज के दिन इंडिया के
वन ऑफ द मोस्ट फेमस और मोस्ट सक्सेसफुल
कंपनीज में से है लेकिन क्या आप जानते हैं
यह कंपनी रातों रात इतनी बड़ी नहीं बन गई
इसे 200 साल का समय लगा था सही सुना आपने
200 साल आज के इस वीडियो में दोस्तों आइए
जानते हैं इंडिया की सबसे पुरानी बिजनेस
फैमिली कीय दिलचस्प कहानी क्या है राज
टाटा का
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[संगीत]
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[संगीत]
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आई प्रेफर वि द नॉले आव ल् दल द हैव वट अ
रान से ग्र टाइम री
[संगीत]
साल 1822 में आज से एगजैक्टली 200 साल
पहले गुजरात में एक गांव में एक पारसी
प्रीस्ट के घर में एक लड़के का जन्म होता
है नसर वांजी टाटा बचपन से ही ये बड़े
रेस्टस रहे थे बेचैनी थी इन्हें कुछ बड़ा
करने की कहा जाता है कि अपने गांव में
इकलौते ऐसे आदमी थे जो बड़ा स्ट्रांग फील
करते थे कि मुझे अपने गांव से बाहर जाकर
कुछ करना है इनका मानना था कि इनकी
डेस्टिनी है इसी रीजन से सिर्फ 20 साल की
उम्र पर य अपना गांव छोड़कर मुंबई शिफ्ट
हो जाते हैं नया बिजनेस शुरू करने की
कोशिश करते हैं आज के दिन भी बहुत से
लड़के ऐसा करते हैं गांव से शहर शिफ्ट हो
जाते हैं नए फ्यूचर की तलाश में लेकिन
फर्क यह था कि इनकी ऑलरेडी एक बीवी थी और
बच्चा था उन जमान में चाइल्ड मैरिज बड़ी
आम बात हुआ करती थी तो सिर्फ 17-18 साल की
उम्र पर इनका बच्चा हो गया था तो ये पूरी
फैमिली को लेकर मुंबई शिफ्ट हुए थे और
कॉटन ट्रेड से काफी आकर्षित हुए देखते ही
देखते जल्द ही ये अपना खुद का कॉटन
एक्सपोर्ट का बिजनेस चला रहे थे बिजनेस से
जितना भी पैसा आता इन्होंने इंश्योर किया
कि अपने बेटे की एजुकेशन पर खर्च करेंगे
ये कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं करना चाहते थे
इस चीज पर इसीलिए इन्होंने अपने बेटे
जमशेद जी को बेस्ट एजुकेशन दी उस वक्त
इसका मतलब था इंग्लिश में एजुकेशन देना तो
अब नसर वान जी का जो कॉटन बिजनेस था वो
अच्छा चलने लग रहा था और कुछ साल बाद जब
जम सेठ जी 18-19 साल के हुए उनकी एजुकेशन
खत्म हुई तो उनके पिता ने डिसाइड किया कि
अब इन्हें बिजनेस एक्सपेंशन के लिए
हांगकांग भेज देते हैं आज के जमाने में ये
चीज बड़ी आम बात लगेगी कि कोई बिजनेसमैन
अपने बेटे को दूसरे देश में भेज रहा है
बिजनेस एक्सपेंशन के लिए लेकिन दोस्तों
याद रखिए यह साल 18592
होने में अभी भी 55 साल बाकी थे उन दिनों
में बड़ा ही लंबा जहाज से सफर तय करना
पड़ता था तो 18592 जी जब सिर्फ 20 साल के
थे खुद उनके पिता ने उन्हें इस मिशन पर
भेजा कि हांगकांग में जाकर एक ऑफिस सेटअप
किया जाए इंटरेस्टिंग जमशेद जी भी अकेले
नहीं थे इनकी ऑलरेडी शादी हो चुकी थी इनकी
एक बीवी थी और एक बच्चा था तो बिल्कुल भी
आसान डिसीजन नहीं था यह अपने पूरे परिवार
को लेकर किसी दूसरी कंट्री शिफ्ट हो जाना
वहां पर बिजनेस करने की कोशिश करना लेकिन
जमशेद जी में भी बहुत उत्साह था और यह
भरपूर तरीके से सक्सेसफुल हुए 65 साल की
अपनी जिंदगी में जमशेद जी ने तीन अलग-अलग
कॉन्टिनेंट्स पर काम किया इंडिया में ढेर
सारी नई कॉटन मिल्स खोली उनके मालिक बने
इसके साथ ही साथ इंडिया की पहली स्टील
फैक्ट्री की कंस्ट्रक्शन शुरू करी और
इंडिया का पहला फाइव स्टार होटल खोला ये
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