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बूढ़ी काकी के सस्ते मोमोज़ | Budhi Kaki Ke Saste Momos | Hindi Kahani | Moral Stories |Bedtime Stories
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Subtítulos (338 segmentos)
[संगीत]
पालमपुर गांव में रहने वाली करुणा की शादी
को लगभग ठ साल ही हुए थे जब उसका पति उसे
और उसके दोनों बच्चों को छोड़कर इस दुनिया
से चला गया घर की जिम्मेदारी अब करुणा पर
आ गई उसकी एक 8 साल की बेटी राधा और 6 साल
का बेटा सुधीर था बिन बाप के बच्चों को
उसने बड़े लाट प्यार से पाला था वह बड़ी
दयालु थी उससे जितना बन पाता उससे वह
गरीबों को कुछ ना कुछ दान पुण्य करती रहती
थी वो लोगों के घरों में काम करके अपने
दोनों बच्चों का पालन पोषण करती है जब भी
छुट्टी वाला दिन होता तो करुणा अपने हाथों
से मोमोज बनाकर अपने दोनों बच्चों को
खिलाती एक रोज वाह मां ये मोमोज तो बड़े
ही अच्छे हैं सचमुच मां तुम्हारे हाथों
में तो जादू है जादू मजा आ गया मां थोड़े
और दो ना हां हां ये लो मोमोज की खुशबू
सूंघ करर अब आज पड़ोस के और भी बच्चे वहां
आ जाते हैं काकी हमें भी दो ना मोमोज हां
काकी हमें भी खाने हैं अच्छा तो तुम दोनों
यहां बैठ जाओ मैं अभी तुम दोनों को मोमोज
देती
हूं करुणा ने उन दोनों बच्चों को भी मोमोज
दिए वो बच्चे भी स्वादिष्ट मोमोज खाकर
बहुत खुश हुए फिर राधा बोली मां आप तो
अपनी मोमोज की दुकान ही खोल लो देखना खूब
बिक्री होगी और थोड़ी दाम कम रखना तो
देखना खूब सारे लोग आएंगे खाने बच्चों की
वही बात करुणा को जच गई और उसने हवेली का
काम छोड़कर एक ठेला खरीद लिया और उसमें
मोमोज बनाकर बेचने लगी उसने सिर्फ ₹ के
हिसाब से मोमोज बेचना शुरू कर दिया जिससे
उसे अच्छी खासी बिक्री होने लगी अब उसने
दोनों बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ने
डाल दिया अब करुणा की मोमोज से अच्छी कमाई
होने
लगी ऐसे ही वक्त गुजरा करुणा बूढ़ी हो गई
राधा ने कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर ली अब वह
शहर में एक अच्छी नौकरी पर लग गई करुणा को
लगा कि अब उसके अच्छे दिन शुरू होंगे
लेकिन राधा को अपने ही ऑफिस में काम करने
वाले लड़के मेहर से प्यार हो गया और दो
महीने के अंदर ही सबकी रजामंदी से उनकी
शादी हो गई शादी के बाद वह दोनों विदेश
में नौकरी करने चले गए और वहीं जाकर बस गए
कुछ समय बाद सुधीर ने भी कॉलेज की पढ़ाई
खत्म कर ली जल्दी लौटना बेटा यह बूढ़ी अब
यहां अकेली रह गई क्या मां पहले जाने तो
दो पहले ही टोक
दिया अब सुधीर भी शहर चला गया और करुणा
गांव में ही रहकर मोमोज बेचने लगी लेकिन
वक्त के साथ और भी दुकानें खुल गई जिसमें
नए-नए तरह से मोज बनाकर बेचने लगे जिस
कारण अब उसकी दुकान इतनी नहीं चलती उधर
शहर में सुधीर की अच्छी नौकरी लग गई और वह
वहीं के ऐशु आराम हो गया और अपनी मां को
भूल गया कुछ समय बाद उसने वहीं एक लड़की
से शादी भी कर ली और उसके साथ वो वहीं बस
गया करुणा के दोनों बच्चे उससे दूर अपनी
अलग दुनिया बसाकर बस गए बूढ़ी करुणा का
काम अब ठीक से नहीं चल रहा था एक रोज
करुणा बहुत धार्मिक स्वभाव की थी वह हर
रोज गणेश जी के मंदिर में जल चढ़ाने जाती
थी और प्रार्थना किया करती थी हे भगवान इस
अभागन पर दया दृष्टि डालो जीवन बहुत कठिन
हो गया है लोगों से उधार लेकर मैंने अपने
बेटे को पढ़ाया और अब वह मुझसे मिलने भी
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