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B1 Mittelstufe Hindi 26:15 Educational

NASA’s Search for Aliens | The Voyager Missions | Dhruv Rathee

Dhruv Rathee · 23,035,296 Aufrufe · Hinzugefügt vor 2 Wochen

Lernstatistiken

B1

GER-Niveau

5/10

Schwierigkeit

Untertitel (627 Segmente)

00:00

नमस्कार दोस्तों क्या इस पूरे ब्रह्मांड

00:02

में हम इंसान अकेले

00:04

हैं या फिर हमारे अलावा भी कहीं और कोई

00:07

इंटेलिजेंट लाइफ मौजूद

00:09

है अगर एलियंस सही में एजिस्ट करते हैं तो

00:13

यह सोचना बड़ा स्वाभाविक है कि शायद

00:15

एलियंस के मन में भी ऐसे ही सवाल उठते

00:17

होंगे कि कहीं इस यूनिवर्स में वो अकेले

00:19

तो नहीं हमारे यूनिवर्स में दो इंटेलिजेंट

00:22

स्पीशीज के बीच में कम्युनिकेशन कैसे

00:24

बनाया जाए इसी सोच को ध्यान में रखते हुए

00:26

नासा ने कई प्रोजेक्ट शुरू किए ताकि हम

00:29

किसी तरह एलियंस को एक संदेश भेज सके ये

00:32

साल 1977 की बात है कि नासा ने अपना वॉयर

00:35

वन स्पेसक्राफ्ट लॉन्च किया और उसका मिशन

00:38

क्लीयरली डिफाइन किया हमारा सोलर सिस्टम

00:40

यानी सौरमंडल की खोज को बाहरी प्लेनेट के

00:43

आसपास से लेकर सूर्य के प्रभाव क्षेत्र की

00:46

भारी सीमाओं तक और शायद उससे भी आगे तक

00:49

बढ़ाना सिंपल भाषा में कहा जाए तो यह एक

00:51

इंटरस्टेलर मिशन था हमारी मिल्की हु

00:54

गैलेक्सी में करोड़ों अरबों सोलर सिस्टम्स

00:56

हैं इन सोलर सिस्टम्स के बीच में जो जगह

00:58

हैं उसे इंटर स्टेलर स्पेस कहा जाता

01:03

है आज के दिन तक

01:11

nas100 2 और न्यू होराइजन और इन पांच में

01:15

से सिर्फ दो ही एक्चुअली में इंटरस्टेलर

01:17

स्पेस तक पहुंच पाए हैं क्योंकि सोलर

01:19

सिस्टम को छोड़कर जाने में बहुत-बहुत लंबा

01:21

समय लगता है और यह दो जो छोड़कर जा पाए

01:24

हैं ये दो बड़े खास हैं वॉयर वन और वॉयर ू

01:28

इन्होंने सोलर सिस्टम की एक ऐसी सैर लगाई

01:31

कि हमें जुपिटर सैटर्न यूरेनस और नेप्ट की

01:33

एक कमाल की फोटोज मिल पाई आज के दिन तक

01:35

वॉयर टू इकलौता स्पेसक्राफ्ट है जो यूरेनस

01:38

और नेप्ट के पास गया है और वॉयर वन का सफर

01:40

तो इतना लंबा रहा है कि ऑफिशियल धरती से

01:43

सबसे दूर पहुंचने वाला मैन मेड ऑब्जेक्ट

01:46

बन चुका है एज ऑफ अक्टूबर 2024 ये

01:49

24.7 बिलियन किलोमीटर दूर है धरती से

01:53

लेकिन इन दोनों वॉयज की सबसे दिलचस्प बात

01:55

तो यही है कि इनमें मौजूद हैं एलियंस के

01:58

लिए ढेर सारे मैसेजेस

02:00

जिनको साथ लिए यह अंतरिक्ष में घूम रहे

02:02

हैं यह मैसेजेस जो इस उम्मीद से भेजे गए

02:04

कि शायद हमारी कभी मुलाकात एलियन से हो और

02:07

इन संदेशों के जरिए हम उन्हें अपने बारे

02:10

में कुछ बता सके व स्प आउट ऑफ आ सोलर

02:12

सिस्टम इनटू द

02:15

यर्स आखिर क्या छिपा है इन पिटर में क्या

02:18

है वह संदेश इंसानों की तरफ से जो नासा

02:21

एलियंस को बताना चाहती है आइए जानते हैं

02:24

वॉयर मिशंस की पूरी कहानी आज के इस वीडियो

02:27

में

02:28

[संगीत]

02:37

ये साल 1965 की बात है दोस्तों कि नासा

02:40

में काम करने वाले एक इंजीनियर ने नोटिस

02:41

किया कि हमारे सोलर सिस्टम के आखिरी चार

02:44

प्लेनेट जुपिटर सैटन यूरेनस और नेप्ट एक

02:47

बड़ी ही अनोखी ज्योमेट्री अरेंजमेंट में आ

02:50

जाएंगे लेट 1970 के समय में एक ऐसी अनोखी

02:53

अरेंजमेंट जो 175 सालों में सिर्फ एक बार

02:56

आती है इस अरेंजमेंट का मतलब था कि एक ऐसा

02:59

स्पेसक्राफ्ट भेजा जा सकता था जो इन चारों

03:02

प्लेनेट के ग्रेविटेशनल फोर्स का फायदा

03:04

उठाकर इन चारों प्लेनेट के पास से गुजर

03:07

जाए बहुत कम फ्यूल और समय इस्तेमाल करते

03:09

हुए इस प्रिंसिपल को ग्रेविटी असिस्ट कहा

03:12

जाता है किसी प्लेनेट या स्पेस में मौजूद

03:14

किसी और ऑब्जेक्ट के मास का इस्तेमाल करना

03:16

अपनी स्पीड और ट्रेजे क्ट्री बदलने के लिए

03:19

इसी के आधार पर नासा ने वॉर वन और वजर टू

03:21

मिशंस के प्लांस बनाए और यही कारण कि साल

03:24

1977 का ईयर चुना गया इन दोनों

03:26

स्पेसक्राफ्ट्स को लॉन्च करने के लिए मिशन

03:28

के अनुसार वजर व को जुपिटर और सैटर्न के

03:31

पास से फ्लाई बाय करना था खासकर सैटर्न के

03:33

बड़े मून टाइटन पर फोकस करते

03:36

हुए और दूसरी तरफ वजर 2 को जुपिटर सैटर्न

03:40

यूरेनस नेप्ट के पास से गुजरना था दोनों

03:42

स्पेसक्राफ्ट्स के डिजाइन की बात करें तो

03:44

एक दूसरे से काफी सिमिलर थे दोनों ही तीन

03:47

रेडियो आइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर

03:49

द्वारा पावर्ड थे इनमें कोई सोलर पैनल्स

03:51

नहीं लगे थे क्योंकि मार्स जुपिटर को पार

03:53

करते ही सोलर एनर्जी काफी हद तक यूजलेस हो

03:56

जाती है उतनी दूर पहुंचकर सूरज की किरणों

03:58

में इतनी एनर्जी ही नहीं रह जाती कि उससे

04:01

कुछ सोलर एनर्जी निकाली जा सके और इनका

04:03

मिशन तो सोलर सिस्टम को पार करना था इसलिए

04:06

ये जो डिवाइसेज हैं ये प्लूटोनियम एलिमेंट

04:08

के रेडियो एक्टिव डीके से पावर्ड है

04:10

प्लूटोनियम जब डीके होता है तो हीट निकलती

04:13

है उस हीट को बिजली में कन्वर्ट करा जा

04:15

सकता है यहीं से ही ये नाम आता है रेडियो

04:18

आइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर इसके

04:20

अलावा दोनों स्पेस प्रोब्स में 10

04:22

साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स लगाए गए थे

04:24

इसमें था एक टू कैमरा इमेजिंग सिस्टम

04:26

तस्वीरें खींचने के लिए एक स्पेक्ट्रोमीटर

04:29

जो जो हाइड्रोजन की एंडेंजर करता दूसरा

04:32

स्पेक्ट्रोमीटर जो अंतरिक्ष में

04:33

अल्ट्रावायलेट एक्टिविटी को मेजर करता एक

04:36

मैग्नेटोमीटर जो प्लेनेट की मैग्नेटिक

04:38

फील्ड्स को मापता एक हाई गेन एंटीना

04:40

कम्युनिकेट करने के लिए धरती के साथ और

04:42

बाकी कुछ छोटे-मोटे इंस्ट्रूमेंट्स

04:44

रेडिएशन के अलग-अलग लेवल्स को मापने के

04:46

लिए इंटरेस्टिंग चीज यह है कि वॉयर टू का

04:48

लंच वॉयर व से पहले किया जाता है 20 अगस्त

04:52

1977 में वॉयर टू लच होता

04:56

है और 16 दिन बाद 5 सितंबर 197 27 को वजर

05:00

वन का लॉन्च होता है नासा केनेडी स्पेस

05:02

सेंटर से जो रस्ता वॉयर व ने लिया वो

05:05

ज्यादा छोटा और तेज था वॉयर ट के कंपैरिजन

05:08

में तो जुपिटर के पास सबसे पहले वॉयर वन

05:10

ही पहुंचता है और मार्च 1979 में ये

05:13

जबरदस्त टाइम लैप्स इसके द्वारा लिया जाता

05:16

है ये 66 अलग-अलग फोटोस से द्वारा बनाया

05:18

गया एक टाइम लैप्स है हर एक तस्वीर जुपिटर

05:21

के एक रोटेशन पीरियड के बाद ली गई है लगभग

05:24

10 घंटे का समय लगता है जुपिटर को रोटेट

05:26

करने में ये पहली बार था कि जुपिटर और

05:28

जुपिटर के मस की इतनी क्ली कट फोटोज हमें

05:30

देखने को मिल पाई और यहीं पर डिस्कवरी हुई

05:33

जुपिटर के रिंग्स की भी बहुत से लोगों को

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