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Anulom Vilom ke 101 fayde || अनुलोम विलोम के 101 फायदे || anulom vilom by puneet biseria
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Subtitles (314 segments)
कि यह देखिए वीडियो में मैं आपको
अनुलोम-विलोम प्राणायाम के बारे में एक दो
चीजें बताऊंगा अब देखिए सबसे पहली चीज तो
आप यह समझिए कि प्राणायाम का मतलब क्या
होता है देखिए प्राण असल में संस्कृत भाषा
का शब्द है जिसका मतलब होता है लाइफ कोर्स
या ने वाइटल एनर्जी और आयाम शब्द का मतलब
होता है किसी चीज किसी काम या फिर किसी
इंसान को या तो आगे लेकर आना या कि फिर
उसको बढ़ा देना और देखिए इसी से प्राणायाम
शब्द का एडमिट मतलब होता है लाइक पोस्ट यह
वाइटल एनर्जी को या तो आगे लेकर आना या
कृपया उसको बढ़ा देना अब चलिए जरा सा
प्राणायाम के बारे में एक दो चीजें समझ
लीजिए
यह देखिए कोई भी प्राणायाम हो उसमें 4
चैप्टर होते ही है जिसमें सबसे पहला स्टेप
होता है पूरक और पूरक में असल में यह किया
जाता है कि हम अपने पेट को डीलर छोड़ते
हुए डायग्राम से धीरे-धीरे और गहराई तक
सांस को अंदर खींचते हैं दूसरा होता है
कुंभक और कुंभक में असल में यह किया जाता
है कि खींची हुई साथ को जितनी देर तक आराम
से अंदर रोक कर रखा जा सकता है उतनी देर
तक उसे अंदर रोक कर रखते हैं तीसरा स्टेप
होता है रोचक और रेचक में खींची हुई सांस
को धीरे-धीरे और पूरी तरह से बाहर की तरफ
छोड़ देते हैं और चौथा स्टेप जो होता है
उसे कहते हैं बाह्य कुंभक और इसमें प्लांट
को पूरी तरह से बाहर छोड़ने के बाद जितनी
देर तक आराम से बिना ताप लिए रहा जा सकता
है उतनी देर तक अपने आपको अंदर नहीं
खींचते अब अनुलोम-विलोम पर और देखिए
अनुलोम-विलोम में असल में यह किया जाता है
कि एक nostrils से साथ अंदर खींची जाती है
और दूसरे nostrils से साथ बाहर छोड़ जाती
है फिर दूसरे nostrils से सांस अंदर
खींचें जाती है और पहले नोजल से काट बाहर
छोड़ी जाती है और इस चीज को कंट्रोल करने
के लिए कि कौन सी nostrils से साफ अंदर
जाए इसके लिए एक नोट चैनल पर अंगूठे का और
दूसरे स्थल पर कनिष्ठा और अनामिका का
इस्तेमाल किया जाता है और जितनी देर सांस
अंदर की तरफ रुख किया है उसे कुंभक और
जितनी देर पर आप बाहर की तरफ रुकती है
उसको बाह्य कुंभक मान लिया जाता है अब
चलिए जरा का यह भी समझ लीजिए कि
अनुलोम-विलोम करने से फायदा क्यों होता है
और कैसे होता है देखिए अगर आप अपनी सांसो
पर ध्यान देंगे तो आप इस चीज को महसूस कर
सकते हैं कि एक समय में आपकी पीठ मुश्किल
दूसरी nostrils से ज्यादा चल रही होती है
या नहीं आपकी एक गूगल से थोड़ी सी ज्यादा
सा रही होती है और दूसरी मुश्किल से बहुत
ही कम सा रही होती है अब देखिए जो है रिबन
राजी होता है उसके साथ यह होता है कि एक
समय में उसकी एक nostrils ज्यादा चल रही
होती है और उसके तीन घंटे के बाद उसकी
दूसरी nostrils ज्यादा चलने लगती है और
ऐसा ही पुरे दिन होता रहता है यह हो गई एक
चीज दूसरी चीज आप यह समझिए कि हमारा दिमाग
जो होता है यह दो है मैं इस पीस में बटा
हुआ होता है जिसमें से एक होता है लेफ्ट
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