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B1 Intermediate Hindi 16:00 Educational

Anulom Vilom ke 101 fayde || अनुलोम विलोम के 101 फायदे || anulom vilom by puneet biseria

Puneet Biseria · 6,278,654 views · Added 4 months ago

Learning Stats

B1

CEFR Level

5/10

Difficulty

Subtitles (314 segments)

00:00

कि यह देखिए वीडियो में मैं आपको

00:03

अनुलोम-विलोम प्राणायाम के बारे में एक दो

00:05

चीजें बताऊंगा अब देखिए सबसे पहली चीज तो

00:08

आप यह समझिए कि प्राणायाम का मतलब क्या

00:11

होता है देखिए प्राण असल में संस्कृत भाषा

00:13

का शब्द है जिसका मतलब होता है लाइफ कोर्स

00:16

या ने वाइटल एनर्जी और आयाम शब्द का मतलब

00:20

होता है किसी चीज किसी काम या फिर किसी

00:23

इंसान को या तो आगे लेकर आना या कि फिर

00:27

उसको बढ़ा देना और देखिए इसी से प्राणायाम

00:31

शब्द का एडमिट मतलब होता है लाइक पोस्ट यह

00:34

वाइटल एनर्जी को या तो आगे लेकर आना या

00:38

कृपया उसको बढ़ा देना अब चलिए जरा सा

00:42

प्राणायाम के बारे में एक दो चीजें समझ

00:44

लीजिए

00:45

यह देखिए कोई भी प्राणायाम हो उसमें 4

00:48

चैप्टर होते ही है जिसमें सबसे पहला स्टेप

00:51

होता है पूरक और पूरक में असल में यह किया

00:55

जाता है कि हम अपने पेट को डीलर छोड़ते

00:58

हुए डायग्राम से धीरे-धीरे और गहराई तक

01:02

सांस को अंदर खींचते हैं दूसरा होता है

01:05

कुंभक और कुंभक में असल में यह किया जाता

01:08

है कि खींची हुई साथ को जितनी देर तक आराम

01:12

से अंदर रोक कर रखा जा सकता है उतनी देर

01:15

तक उसे अंदर रोक कर रखते हैं तीसरा स्टेप

01:19

होता है रोचक और रेचक में खींची हुई सांस

01:22

को धीरे-धीरे और पूरी तरह से बाहर की तरफ

01:27

छोड़ देते हैं और चौथा स्टेप जो होता है

01:30

उसे कहते हैं बाह्य कुंभक और इसमें प्लांट

01:34

को पूरी तरह से बाहर छोड़ने के बाद जितनी

01:37

देर तक आराम से बिना ताप लिए रहा जा सकता

01:41

है उतनी देर तक अपने आपको अंदर नहीं

01:44

खींचते अब अनुलोम-विलोम पर और देखिए

01:48

अनुलोम-विलोम में असल में यह किया जाता है

01:50

कि एक nostrils से साथ अंदर खींची जाती है

01:53

और दूसरे nostrils से साथ बाहर छोड़ जाती

01:56

है फिर दूसरे nostrils से सांस अंदर

01:58

खींचें जाती है और पहले नोजल से काट बाहर

02:02

छोड़ी जाती है और इस चीज को कंट्रोल करने

02:05

के लिए कि कौन सी nostrils से साफ अंदर

02:08

जाए इसके लिए एक नोट चैनल पर अंगूठे का और

02:12

दूसरे स्थल पर कनिष्ठा और अनामिका का

02:15

इस्तेमाल किया जाता है और जितनी देर सांस

02:17

अंदर की तरफ रुख किया है उसे कुंभक और

02:20

जितनी देर पर आप बाहर की तरफ रुकती है

02:22

उसको बाह्य कुंभक मान लिया जाता है अब

02:26

चलिए जरा का यह भी समझ लीजिए कि

02:28

अनुलोम-विलोम करने से फायदा क्यों होता है

02:31

और कैसे होता है देखिए अगर आप अपनी सांसो

02:35

पर ध्यान देंगे तो आप इस चीज को महसूस कर

02:38

सकते हैं कि एक समय में आपकी पीठ मुश्किल

02:41

दूसरी nostrils से ज्यादा चल रही होती है

02:44

या नहीं आपकी एक गूगल से थोड़ी सी ज्यादा

02:47

सा रही होती है और दूसरी मुश्किल से बहुत

02:50

ही कम सा रही होती है अब देखिए जो है रिबन

02:54

राजी होता है उसके साथ यह होता है कि एक

02:57

समय में उसकी एक nostrils ज्यादा चल रही

02:59

होती है और उसके तीन घंटे के बाद उसकी

03:02

दूसरी nostrils ज्यादा चलने लगती है और

03:05

ऐसा ही पुरे दिन होता रहता है यह हो गई एक

03:09

चीज दूसरी चीज आप यह समझिए कि हमारा दिमाग

03:12

जो होता है यह दो है मैं इस पीस में बटा

03:15

हुआ होता है जिसमें से एक होता है लेफ्ट

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