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जब मनोज को ट्रेन में मिली खूबसूरत लड़की | एक सच्ची घटना | Hindi Horror Story Episode 36
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कर दो
[प्रशंसा]
कि डर इट एहसास में आपका स्वागत है यहां
पर आपको देखने को मिलती हैं सच्ची और
डरावनी भूतिया घटनाएं हर रोज तो अगर अबतक
आपने हमारा यह चैनल सब्सक्राइब नहीं किया
है तो इसे जल्द ही सब्सक्राइब कर लें तो
अब हम अपनी कहानी शुरू करते हैं
कि मेरा नाम मनोज है और यह घटना मेरे साथ
साल पहले घटी थी मुझे रात के वक्त ट्रेन
पकड़नी थी लेकिन मुझे स्टेशन तक जाने में
साथ किलोमीटर का सफर तय करना था यह सफर
मैंने इस साइकिल से तय करना था ट्रेन लगभग
मुझे रात के 11:00 पकड़नी थी तो मैं घर से
लगभग 10 बजे निकला घर से निकलने से पहले
मुझे मेरे पापा नहीं यही कहा था कि रात के
वक्त सुने जा रहे हो इसलिए परफ्यूम लगा कर
मत जाना मैंने उसे कहा कि परफ्यूम लगाकर
जाने में क्या प्रॉब्लम है तो उन्होंने
कहा कि परफ्यूम लगाना या रात को दूध पीकर
बाहर जाना इससे भूत-प्रेत पीछे लग जाते
हैं इसी लिए बुजुर्गों ने यह करने से मना
किया है मैं वैसे भूत-प्रेतों पर यकीन
नहीं करता था इसीलिए मैंने पापा को कहा कि
आप सो जाइए मैं चला जाऊंगा
कि मैं एक छोटे से गांव में रहता हूं और
यहां से 10 साल से निकलकर मुझे शहर की तरफ
जाना पड़ता है वैसे मैं रात के समय कभी
शहर नहीं जाता लेकिन इस बार मुझे ट्रेन
पकड़नी थी इसीलिए मैं रात के 10:00 निकलने
वाला था जब पापा अपने कमरे में चली गई तो
मैंने चुपके से परफ्यूम उठाया और खुद को
लगा लिया मैं सोच रहा था कि यहां से जाना
है तो अच्छे से सजधज कर जाऊंगा और परफ्यूम
लगाकर जाऊंगा मैं पुरानी बातों को नहीं
मानता ऐसे ही मैंने परफ्यूम लगाया और मैं
जल्दी से बाहर निकला मैंने इस साइकिल उठाई
और मैं चढ़ने लगा वहां से मैंने आवाज़
लगाई कि पापा दरवाजा अंदर से बंद कर लो
पापा वहीं खड़ी देख रहे थे वह मेरी तरफ
घूम रहे थे शायद उनको परफ्यूम की स्मेल आ
गई होगी लेकिन मैंने तेजी से साइकिल उठाई
और वहां से निकल गया ऐसे ही मैं धीरे-धीरे
रास्ता नापने लगा मेरे पास एक घंटा था
वैसे भी साइड
आधे घंटे का सफर था वह तो मैं धीरे-धीरे
साइकिल चलाने लगा गांव से निकलते ही मैं
उस सुनसान में पहुंचा रात के वक्त मैं
यहां से कभी नहीं निकलता वैसे भी यहां पर
कहानियां सुनाई जाती हैं कि यहां पर खूब
रहते हैं लेकिन मैं कई बार यहां से निकल
चुका था मुझे ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ शायद
मैं कभी यहां पर रात को नहीं आया इसलिए
लेकिन मैं भूत-प्रेत पर यकीन नहीं करता
इसीलिए मैं गाना गुनगुनाते हुए वहां से
निकलने लगा ऐसे ही मैं वहां से जा रहा था
लेकिन तभी जैसे मेरी साइकिल की चेन उतर गई
यह हर रोज का काम था मेरी साइकिल कभी-कभी
मुझे खराब करती थी तो मैं साइकिल की चैन
ठीक करने लगा जैसे ही मैंने सायकल का
स्टैंड लगाया और साइकिल की चेन में ठीक
करने लगा था कि मुझे ऐसा लगा जैसे कोई
मेरे पास से निकला हो मैंने पीछे मुड़ कर
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