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Zakir Khan | Jashn-e-Rekhta 2017
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난이도
자막 (402 세그먼트)
कि मैं शून्य पर सवार हूं बे अदब सा मैं
खुमार हूं अब मुश्किलों से क्या डरूं मैं
खुद कहर हजार हूं मैं शून्य पर सवार हूं
कि ऊंच नीच से परे मजाल आख में भरे मैं
लड़ पड़ा हूं रात से मशाल हाथ में लिए ना
सूर्य मेरे साथ है तो क्या नहीं यह बात है
वो शाम को ता ढल गया वो रात से था डर गया
मैं जुगन का यार हूं मैं शून्य प सवार हू
बहुत लोगों को शायद पता नहीं है तो अपन
बहुत ज्यादा हैवी म्यूजिकल बैकग्राउंड से
आते हैं ठीक है तो अपने खानदान में मेरे
दादा उस्ताद मोइनुद्दीन खा साहब ठीक है
मेरे वालिद साहब उस्ताद इस्माइल खा साहब
ठीक है तो घर में ही इतना म्यूजिक का
माहौल होता था और गाने वाले बहुत सारे लोग
हैं ठीक है
तो जब मैं थोड़ा बड़ा हुआ और मुझे थोड़ा
दिलचस्पी शुरू हुई मेरी पढ़ने में शायरों
को तो मुझे पहले से पता थी है
गजल मुझे मालूम है कि हर एक बात पे कहते
हो तुम तो तू क्या है ठीक
है तो अक्सर लोगों को शायर पहले पता होता
है और उसके बाद वो पढ़ना शुरू करते हैं कि
यार गालिब का एक शेर ऐसा ऐसे ऐसे तो मुझे
लोगों के आधे आधे दीवान याद थे और बाद में
पता चले कि अच्छा ये तो फैज अहमद फैज का
है तो वो थोड़ा रिवर्स इंजीनियर हुआ तरीका
ऊपर से फिर क्या होता है कि जब आपको इश्क
होता है तो क्या होता है उन्होंने कह दिया
रे जशने रता कि साल
र अरे दिख तो ना
र हा तो यार जब इश्क होता है ना आपको तो
क्या होता है कि आप अब यार अपने को गिटार
बजानी नहीं आती है ठीक
है तो कोई तो हथियार निकालना ही पड़ेगा
ना तो उस वक्त थोड़ा मोड़ा लिखना लिखने की
कोशिश करी उसमें से कुछ अच्छा है कुछ बुरा
है कुछ सही है कुछ गलत है तो बस वही है आज
अच्छा वाला सुनाएंगे बुरा वाला देखो अपना
वाला सुनाएंगे क्या बात है क्या बात है तो
इससे पहले आप अपना सुनाए वो कौन से शायर
हैं जो आपको इंस्पायर कर गए यार तो जैसे
जैसे जैसे अपने को भी ना घमंड बहुत है
बचपन से ठीक है जैसे नाम मेरा अभी हुआ
घमंडी मैं बचपन से हूं ठीक है
ठीक
है तो जैसे गुरूर अगर किसी में है ना तो
मिर्जा गालिब में है बाकी सब तो कोशिश कर
रहे हैं ठीक
है जैसे ये शेर है की बाय जोय जो लाइन है
कि बाजी चाहे अफल है दुनिया में र बच्चों
का खेल है क्या है ऐसे थोड़ ठीक है एक
जबसे सबसे गालिब का सबसे गम में डूबा हुआ
शेर ठीक है कि ऐसे
की दिल ही तो है ना संगो दर्द से बढ़ ना
जा
रोएंगे हम हजार बार हमें सताए कितना
एटीट्यूड है इसम जबक रोने भने की बातें हो
रही है यार दिल है भाई पत्ता थड़ी हो जाए
भरेगा भरेगा तो और रोना आएगा तो रोएंगे को
परेशान क्यों कर रहे पर
तुम तो जो एटीट्यूड मिर्जा गालिब में जो
है अब जैसे एक बात है जो
जो जो अहमद फराज साहब ने कही है कि अब और
कितनी मोहब्बत तुझे चाहिए फराज माओ ने
तेरे नाम पर ब ब के नाम रख दिए ठीक है
कितनी प्यारी बात है ना कि ठीक है अब यह
बात है कि भाई कितने मशहूर हो गए हम ठीक
है इस इस बारे में बात हैय लोग अक्सर कहते
हैं कि वर्क टिल यर सिग्नेचर बिकम
ऑटोग्राफ और ये वो ऐसे ऐसे तरीके से
मिर्जा गालिब कहते हैं कि वो पूछते हैं कि
गालिब कौन है कोई हमें बतलाए कि हम बतलाए
क्या आता ही नहीं है इंट्रोड्यूस कैसे
करें याद नहीं है आखरी बार कब बताया था कि
साहब मैं मिर्जा
गालिब तो कंफ्यूज है अब हम देख रहे हो
उनकी अड़ अलग ही लेवल प थी ये कंफ्यूज है
कि कैसे क्या क्या मिर्जा लिब आप कौन साब
मम के आसपास तारीफ करने वाले लोग गए क्या
आज कोई और बताएगा यार लड़के घूमते हैं
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