The video owner has disabled playback on external websites.
This video is no longer available on YouTube.
This video cannot be played right now.
Watch on YouTube
Laal Singh Chaddha Boycott | Is Aamir Khan Anti-Hindu? | PK | Dhruv Rathee
학습 통계
CEFR 레벨
난이도
자막 (637 세그먼트)
नमस्कार दोस्तों, आइए बात करते हैं लाल
सिंह चड्डा के पॉलिटिकल इशू के बारे में।
सही सुना आपने। लाल सिंह चड्डा कोई साधारण
फिल्म नहीं रहेगी। देश में यह एक पॉलिटिकल
इशू बन चुका है। पिछले दो-तीन हफ्तों से
Twitter पर रोज ट्रेंड चल रहे हैं इसको
लेकर। जितनी चर्चा इस फिल्म की की गई है
इस साल में शायद ही किसी और फिल्म की करी
गई है। एक तरफ बाहरी नारे लग रहे हैं इसे
बॉयकॉट करने के। आमिर खान को हिंदू फोबिक
और एंटीनेशनल घोषित किया जा रहा है। दूसरी
तरफ कुछ लोग इस फिल्म को भरपूर प्यार भी
दे रहे हैं। जैसे कि मुझे तो बहुत बढ़िया
लगी ये फिल्म। मेरी राय में ये एक मस्ट
वॉच फिल्म है। लेकिन ये जो हिंदू फोबिया
की बात करी जा रही है ये पीके फिल्म से
शुरू हुई थी ये बात। ये बॉयकॉट्स और ये
ट्रोलिंग इन चीजों को थोड़ा गहराई से
देखते हैं आज के वीडियो में।
लाल सिंह चड्डा एंड रक्षाबंधन बोथ फिल्म्स
हैव रिकॉर्डेड पुअर ओपनिंग्स।
लाल सिंह चड्डा मूवी देखने के लिए आए हैं।
सर उसका बहिष्कार कीजिए।
अ प्रोटेस्ट ब्रोक आउट एट अ मोल इन जालंधर
अगेंस्ट दिस फिल्म एलेजिंग दैट द फिल्म
हैज़ हर्ट द रिलीजियस सेंटीमेंट। अगर मैंने
किसी का दिल दुखाया है किसी चीज से तो
मुझे उस बात का दुख है और मैं किसी का दिल
नहीं दुखाना चाहता हूं।
[संगीत]
देशभक्त और देशद्रोही एक समय हुआ करता था
दोस्तों जब ये दोनों शब्द बड़े हैवी शब्द
हुआ करते थे। जब कोई इन शब्दों का
इस्तेमाल करता था तो कुछ मायने होते थे
उसके कि इनसे मिली ये एक बड़े देशभक्त
टाइप के इंसान हैं। कोई बड़े ब्रेव आर्मी
ऑफिसर हैं या कोई सोशल वर्कर जिन्होंने
हजारों पेड़ प्लांट कर दिए हो या कोई
एक्टिविस्ट जो किसी सोशल इवल के खिलाफ लड़
रहे हैं। और सिमिलरली देशद्रोही और गद्दार
शब्द भी बड़े हैवी शब्द हुआ करते थे।
इससे पहले कि मैं तुझे गद्दार करार देकर
गोली मार दूं।
भाग जा यहां से। जब भी आप देशद्रोही या
गद्दार शब्द को सुनते थे तो आपके दिमाग
में जो पिक्चर आती थी एक ऐसे इंसान की आती
थी जिसने कोई मान लो टॉप मिलिट्री
सीक्रेट्स किसी दुश्मन देश को लीक कर दिए
हो या कोई स्पाई कर रहा हो किसी दुश्मन
देश के लिए लेकिन आज के दिन क्या हो गया
है ये देशभक्त और देशद्रोही होने के
सर्टिफिकेट्स बल्क में बांटे जाते हैं। यह
देशद्रोही वो देशभक्त तू देशद्रोही आपका
कोई स्कूल का दोस्त हो वो भी देशद्रोही
निकल जाता है। कोई आपका पड़ोसी कुछ कह दे
अपनी राय दे दे किसी चीज पर वो भी
देशद्रोही निकल जाता है। एक्चुअली में
कंडीशन काफी सिंपल है। अगर आप एक
पर्टिकुलर पॉलिटिकल पार्टी का नैरेटिव
फॉलो कर रहे हैं, उसके साथ चल रहे हैं, तो
आपको देशभक्त होने का सर्टिफिकेट मिल जाता
है। अगर आप उस नैरेटिव के खिलाफ कुछ भी कर
दें तो आपको देशद्रोही बता दिया जाता है।
फॉर एग्जांपल इस इंसान को ही ले लीजिए। यह
जेनोसाइड की बातें करता है एक कम्युनिटी
के खिलाफ। औरतों के बारे में बड़ी चीप
चीजें कहता है। यहां तक कि तिरंगे को
बॉयकॉट करने की भी बात करने लग रहा है।
लेकिन ना तो यह जेल में है और ना ही इसे
किसी ने देशद्रोही कहा। क्यों? क्योंकि यह
एक पर्टिकुलर पॉलिटिकल पार्टी के नैरेटिव
के फेवर में बात करता है। लेकिन जरा सोच
कर देखिए नसीरुद्दीन शाह जितने बड़े
कलाकार उन्हें देशद्रोही का लेबल कैसे मिल
गया? एक इंसिडेंट हुआ था आज से कुछ साल
पहले बुलंदशहर के पास जहां पर एक गांव में
तीन गाय की लाशें पाई गई। इसके बाद एक
भीड़ ने जिसे एलिजिडली लीड किया जा रहा था
बजरंग दल के मेंबर्स के द्वारा। उन्होंने
जाकर एक पुलिस थाने पर आग लगा दी। फिर
दंगे देखे गए। कुछ गाड़ियों पर भी आग लगाई
गई और फिर गन फायर हुई जिसमें एक पुलिस
इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या हो
गई। साथ में एक स्टूडेंट सुमित कुमार भी
मारे गए। और जो एडिशनल सुपरिंटेंडेंट थे
पुलिस के उन्होंने स्टेटमेंट दी इस
इंसिडेंट के बाद कि काऊ किलर्स आर अ टॉप
प्रायोरिटी। जो मर्डर और राइटिंग हुई उसे
हम बाद में देखेंगे पहले हम गाय के
हत्यारों को पकड़ेंगे। तो हुआ ये था कि
नसरुद्दीन शाह बड़े शॉक हो गए इस इंसिडेंट
को देखकर और उन्होंने कहा कि गाय की हत्या
के ज्यादा मायने हैं एक इंसान की हत्या के
कंपैरिजन में। एज एन इंडियन इस बात को
सुनकर उन्हें बड़ी चिंता होती है और इसी
चीज को लेकर उन पर देशद्रोही का लेबल लगा
दिया गया क्योंकि ऐसी बातें बोलना एक
पर्टिकुलर पॉलिटिकल पार्टी के नैरेटिव के
खिलाफ जाता है। रवश कुमार को ही ले लीजिए
मीडिया का काम है असली इश्यूज पर बात करना
जो प्रॉब्लम्स हैं देश में उन्हें हाईलाइट
करना ताकि उन्हें सुधारा जा सके। तो रवश
कुमार जब इन्फ्लेशन, अनइंप्लॉयमेंट,
पब्लिक यूनिवर्सिटीज, जॉब्स जैसे इशूज़ पर
बात करते हैं। उनकी प्रॉब्लम्स को हाईलाइट
करते हैं। उन पर भी देशद्रोही का लेबल लगा
दिया जाता है। वैसे तो वो अपना काम करने
लग रहे हैं लेकिन नैरेटिव के खिलाफ बात जा
रही है। तो आमिर खान की जो पहली
कंट्रोवर्सी है उसमें भी कुछ ऐसा ही हुआ।
उनसे एक इंटरव्यू में पूछा गया कि उनकी
क्या राय है देश की सिचुएशन के बारे में।
अब अगर वो जवाब देते, ऑल इज वेल, ऑल इज
वेल।
सब चंगा सी।
तो कोई प्रॉब्लम नहीं होती। सब कुछ सही
होता उनके लिए। लेकिन प्रॉब्लम ये थी कि
उन्होंने अपने जवाब में कहा कि देश में
इनटोलरेंस बढ़ने लग रही है।
देयर हैज़ बीन अ ग्रोइंग सेंस ऑफ़
डिस्पोंडेंसी आई वुड से फॉर द फर्स्ट टाइम
किरण सेज़ शुड वी मूव आउट ऑफ इंडिया? नो
दैट शी फियर्स फॉर हर चाइल्ड शी फियर्स
फॉर यू नो व्हाट द एटमॉस्फेयर अराउंड अस
विल बी शी फील स्केयर्ड टू ओपन द
न्यूज़पेपर्स एवरीडे। ये बात सुनकर कुछ लोग
बहुत गुस्सा हुए। ऐसे कैसे बोल दिया कि हम
टोलरेंट नहीं है। हैं? इसे तो हम सबक
전체 자막은 비디오 플레이어에서 이용 가능
댓글 (0)
로그인하여 댓글 달기인터랙티브 모드
퀴즈
정답:
관련 영상
Dharmendra Teaching Shooting To Hema Malini | Comedy Scene | Sholay Hindi Movie
तालाब की रानी का न्याय - पिछले जन्म का बदला | हिंदी कहानी | Hindi Moral Story | Cartoon video
इंजीनियर बनने के लिए 10वीं बाद क्या करें ? | how to become a engineer after 10th | Exam वाले Bhaiya
Chai Time Comedy with Kenny Sebastian : Newspapers, Speaking Tree & EDM Music.
सिर्फ 15 मिनट में पूरा प्लान दिखाइए | MI Lifestyle Plan Presentation | Amar Aryan
Dhruv Rathee
퀴즈
정답:
영상을 보면서 퀴즈가 나타납니다
암기 팁
이 영상에서
무료로 언어 학습