The video owner has disabled playback on external websites.
This video is no longer available on YouTube.
This video cannot be played right now.
Watch on YouTube
Is Taj Mahal a Temple? | The Mystery Explained by Dhruv Rathee
학습 통계
CEFR 레벨
난이도
자막 (573 세그먼트)
नमस्कार दोस्तों, क्या है रहस्य ताजमहल
का? आखिर क्या छिपा है ताजमहल के उन 22
बंद दरवाजों के पीछे? कुछ लोगों का कहना
है कि उनके पीछे हिंदू भगवानों की
मूर्तियां हैं। दूसरी तरफ कुछ लोग कहते
हैं कि उनके पीछे आपको मिलेंगे अच्छे दिन।
पहले दरवाजे के पीछे सस्ता पेट्रोल डीजल।
दूसरे दरवाजे के पीछे एंप्लॉयमेंट
अपॉर्चुनिटीज। कुछ लोग तो यह तक कहते हैं
कि ताजमहल एक्चुअली में एक शिव मंदिर है
जिसका असली नाम है तेजो महल्य। एक थ्योरी
के अनुसार मुगल बादशाह शाहजहां ने इसे
नहीं बनाया था बल्कि इसे बनाया गया था
राजा परमारदी देव के द्वारा 13th सेंचुरी
में। उसके बाद यह पास डाउन हुआ राजा
मानसिंह को और शाहजहां ने एक्चुअली में
ताजमहल को खरीदा उनके पोते राजा जय सिंह
से। ऐसे ही एक और पॉपुलर थ्योरी ताजमहल के
बारे में बताई जाती है कि एक्चुअली में
शाहजहां ने 20,000 लेबरर्स के हाथ कटवा
दिए थे ताजमहल बनाने के बाद ताकि वो जो
वर्कर्स हैं जिन्होंने ताजमहल को बनाया वो
कोई भी ऐसा इतना सुंदर मोन्युमेंट ना बना
पाए। अब एक थ्योरी के अनुसार तेजो महालय
बना था 13थ सेंचुरी में। दूसरी के अनुसार
शाहजहां ने अपने वर्कर्स के हाथ कटवाए थे
17 सेंचुरी में 450 साल बाद। तो ऐसा तो हो
नहीं सकता कि ये दोनों चीजें सच हो। इसलिए
आज की वीडियो में आइए सच जानने की कोशिश
करते हैं, दोस्तों, क्या है इतिहास ताजमहल
का? इन अलग-अलग थ्योरीज में कितनी सच्चाई
है और क्या छिपा है ताजमहल के उन बंद 22
दरवाजों के पीछे?
दुनिया का सातवां अजूबा प्यार की निशानी।
कहा जाता है कि इतिहास तत्वों पर आधारित
होता है ना कि भावनाओं पर।
कैसा इतिहास? कहां का इतिहास? कौन सा
इतिहास? याचिकाकर्ता की मांग है कि ताजमहल
में मौजूद 20 बंद कमरों को खोला जाए।
एंड द जजेस हैव स्लम्ड द ताजमहल पटिशनर।
दोस्तों ताजमहल की असली और एक्चुअल
हिस्ट्री समझते हैं पहले। शाहजहां और
मुमताज क्या थे इनके असली नाम? शाहजहां का
जन्म हुआ था 5िफ्थ जनवरी 1592 को। इनका
असली नाम था खुर्राम। शाहजहां जो रॉयल नाम
था इनका यह बाद में ही दिया गया इन्हें।
इसका मतलब होता है किंग ऑफ द वर्ल्ड
शाहजहां। इनके फादर थे जहांगीर और इनकी
मदर थी जगत गोसेन जो कि जहांगीर की चीफ
क्वीन थी। दूसरी तरफ मुमताज महल का जन्म
हुआ था साल 1593 में। मुमताज महल भी जो
नाम था वह एक्चुअली में इनकी शादी के बाद
ही दिया गया था इन्हें। इनका असली नाम था
अर्जुमंत बानू बेगम। तो खुर्राम और मुमताज
की इंगेजमेंट हुई थी साल 1607 में और
फाइनली शादी हुई साल 1612 में। शाहजहां की
और भी बीवियां थी जैसे कि कंधहरी महल और
अकबराबादी महल लेकिन कोर्ट हिस्टोरियंस के
अकॉर्डिंग एक्चुअली में ये जो मैरिजेस थी
ये पॉलिटिकल अलायंसेस के तौर पर हुई थी।
बहुत से अलग-अलग हिस्टोरिकल अकाउंट्स हमें
बताते हैं कि शाहजहां की जो रिलेशनशिप थी
बाकी और बीवियों के साथ वो सिर्फ एक कहने
के लिए मैरिज थी। पॉलिटिकल अलायंसेस बनाए
रखने के लिए शादियां करी गई थी। एक्चुअली
में शाहजहां के अंदर जो डीप अफेक्शन थी,
जो उनके अंदर प्यार था वो मुमताज के लिए
कहीं ज्यादा था उनकी और बीवियों के
कंपैरिजन में। यही रीज़न था कि उन्हें और
फेवर्स दिए गए। जैसे कि मलिका ए जहां यानी
क्वीन ऑफ द वर्ल्ड। उनका जो पैलेस था खास
महल कहा जाता है कि उसे प्योर गोल्ड और
प्रेशियस स्टोन से डेकोरेट किया जाता था।
हिस्टोरिकल रिकॉर्ड्स के अकॉर्डिंग मुमताज
का काफी इंटरेस्ट था एडमिनिस्ट्रेशन में
भी। तो शाहजहां जहां भी जाते थे
डिप्लोमेटिक नेगोशिएशंस के लिए या कभी
लड़ाई के लिए मुमताज हमेशा उनके साथ जाती
थी। एक तरफ जहां शाहजहां का एग्जैक्टली एक
बच्चा हुआ उनकी बाकी सारी बीवियों के साथ
मुमताज महल के साथ उनके 14 बच्चे हुए। आधे
बच्चे तो चाइल्ड बर्थ के दौरान ही मारे
गए। ये चीज आम बात होती थी उन जमानों में।
हेल्थ केयर सिस्टम इतना अच्छा नहीं होता
था। अनफॉर्चुनेटली मुमताज की डेथ हो गई जब
वो अपने 14वें बच्चे को जन्म देने लग रही
थी। यह बात है एग्जैक्टली 17 जून 1631 की।
कहा जाता है कि एक्चुअली में एक कॉज ऑफ
डेथ थी पोस्टपार्टम हेमरेज लॉस ऑफ ब्लड।
उनकी डेथ के बाद शाहजहां एक्चुअली में
भारी गम में डूब गए। वो पैरालाइज हो गए
अपनी ग्रीफ से। कई दिनों तक हफ्तों तक
रोते रहे और कहा जाता है कि एक साल तक वो
आइसोलेशन में चले गए थे मॉर्निंग करने के
लिए। जब वह वापस आए, उनके बाल सफेद हो
चुके थे। उनकी कमर झुक चुकी थी और उनके
चेहरे पर थकान दिखती थी। इस्लामिक
थियोलॉजी में माना जाता है कि मृत्यु के
बाद जो बॉडी होती है वो मिट्टी में मिल
जाती है। लेकिन जो आत्मा होती है वो ग्रेव
में रहती है। आत्मा बाद में जजमेंट डे के
पास जाती है जब डिसाइड होता है कि वो
स्वर्ग में जाएगी या नर्क में जाएगी। तो
जो ग्रेव होता है उसे फाइनल रेस्टिंग
प्लेस माना जाता है एक आत्मा की सोल की।
शाहजहां का यह मानना था कि मुमताज की
आत्मा की जो फाइनल रेस्टिंग प्लेस होगी,
वह बहुत ही ग्रैंड होनी चाहिए। लाजवाब
होनी चाहिए। जब उन्होंने ताजमहल बनाने का
फैसला किया तो चीफ आर्किटेक्ट उस्ताद अहमद
लोहरी। उन्हें टाइटल दिया गया ना असर का।
द वंडर ऑफ द एज। जो वाइट मार्बल पैनल्स पे
कैलग्राफी करी गई है वो करी गई है अब्दुल
हक शिराजी के द्वारा। 1000 से ज्यादा
हाथियों का इस्तेमाल किया गया था बिल्डिंग
전체 자막은 비디오 플레이어에서 이용 가능
댓글 (0)
로그인하여 댓글 달기인터랙티브 모드
퀴즈
정답:
관련 영상
“Je Rab Milda” | Devotional Soul-Stirring Sufi Punjabi Kalam | Hazrat Baba Bulleh Shah 2026
sad scene kabhi khushi kabhie gham
Mismatched: Season 3 | Official Trailer | @MostlySane, Rohit Saraf, Ahsaas Channa | Netflix India
Korn - Falling Away From Me (Official Video)
How to Choose the Right Stream After Class 10th?🔥| Watch This Before Choosing | Prashant Kirad
Dhruv Rathee
퀴즈
정답:
영상을 보면서 퀴즈가 나타납니다
암기 팁
이 영상에서
무료로 언어 학습