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B1 متوسط الهندية 17:27 Educational

Indira Gandhi's Emergency | Why it happened? | The Real Story | Dhruv Rathee

Dhruv Rathee · 12,105,814 مشاهدات · أُضيف منذ 3 أسابيع

إحصائيات التعلم

B1

مستوى CEFR

5/10

الصعوبة

الترجمة (429 مقاطع)

00:00

नमस्कार दोस्तों, साल था 1975, प्राइम

00:03

मिनिस्टर इंदिरा गांधी देश भर में

00:04

इमरजेंसी डिक्लेअर कर देती हैं और अगले 2

00:07

सालों के लिए लोगों के फंडामेंटल राइट्स

00:09

को सस्पेंड कर दिया जाता है। ढेरों

00:11

अपोजिशन लीडर्स को जेल में डाल दिया जाता

00:14

है और इतिहास के इस हिस्से को एक काला

00:17

धब्बा माना जाता है इंडियन डेमोक्रेसी पर।

00:20

लेकिन एग्जैक्टली क्या रीज़न था इमरजेंसी

00:22

डिक्लेअ करने के पीछे? क्यों इसे किया

00:24

गया? और क्यों इसे इतना खौफनाक माना जाता

00:27

है? आज के इस हिस्ट्री के वीडियो में आइए

00:30

इस इवेंट को गहराई से जानने की कोशिश करते

00:33

हैं। प्रेसिडेंट हैज़ प्रोक्लेम्ड

00:35

इमरजेंसी।

00:36

दिस इज नथिंग टू पैनिकिक अबाउट।

00:39

[संगीत]

00:42

क्रांति है मित्रों और संपूर्ण क्रांति।

00:45

लार्जेस्ट पीरियड इन इंडियास हिस्ट्री एक

00:47

ऐसा काला दिन काला दिन काला दिन। हमारा

00:50

पूरा मकसद इस समय यह है कि स्थिति शांति

00:54

और चिरता की।

00:59

आपको जानकर शायद हैरानी होगी दोस्तों कि

01:01

1975 पहली बार नहीं था कि देश में

01:03

इमरजेंसी डिक्लेअर करी गई हो। इससे पहले

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1962 की इंडो चाइना वॉर में और 1971 की

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इंडिया पाकिस्तान वॉर में भी इमरजेंसी

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डिक्लेअ करी गई थी। हालांकि 1975 वाली

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इमरजेंसी इन दोनों से काफी अलग थी।

01:16

क्योंकि उसके पीछे कोई एक लड़ाई या कोई एक

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रीजन नहीं था। बल्कि कई सारी घटनाएं हुई

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थी। कई सारे सीक्वेंस ऑफ इवेंट्स थे जिनका

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आउटकम ये 1975 की इमरजेंसी निकली थी। तो

01:27

ये सीक्वेंस ऑफ इवेंट्स एक्चुअली में 1969

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में शुरू होते हैं जब कांग्रेस पार्टी

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पावर में थी और फोर्थ फाइव ईयर प्लान को

01:34

इंप्लीमेंट किया जा रहा था। 1969 में

01:37

कांग्रेस पार्टी डिसाइड करती है कि 14

01:39

प्राइवेट बैंक्स को नेशनलाइज किया जाएगा।

01:42

इसका मतलब सरकार उन बैंक्स की ओनरशिप ले

01:45

लेगी उन प्राइवेट कंपनीज़ से। इमेजिन कीजिए

01:48

आप किसी कंपनी के मालिक हैं या फिर किसी

01:50

कंपनी में आपने शेयर्स खरीद रखे हैं और कल

01:52

को सरकार कहती है कि कल से यह कंपनी सरकार

01:55

के हाथों चली गई तो आपके तो सारे पैसे गए

01:58

ऑब्वियसली आप खुश नहीं होएंगे इस डिसीजन

02:00

से। तो बहुत से बिजनेसमैन जैसे कि जेआरडी

02:02

टाटा और इन्वेस्टर्स और शेयर होल्डर्स इस

02:04

नेशनलाइजेशन के डिसीजन को अपोज करते हैं।

02:07

18 जुलाई 1969 को डिसीजन लिया जाता है

02:10

सरकार के द्वारा कि इसे ऑर्डिनेंस के थ्रू

02:12

पास किया जाएगा। लेकिन सरकार जल्द ही

02:14

रियलाइज करती है कि पार्लियामेंट सेशन 21

02:16

जुलाई से शुरू होने वाला है और प्रेसिडेंट

02:18

अपने ऑफिस को 20th को छोड़ने वाले हैं। तो

02:21

ऑर्डिनेंस को बड़ी जल्दी में बनाया जाता

02:23

है और ऑलमोस्ट ओवरनाइट प्रेसिडेंट के

02:26

द्वारा इसे साइन कराया जाता है

02:28

पार्लियामेंट सेशन से पहले। तो क्लियरली

02:30

आप देख सकते हैं इंदिरा गांधी इस पॉलिसी

02:32

को कितना इंपॉर्टेंट समझती थी देश के लिए।

02:35

इंदिरा गांधी की तरफ से जस्टिफिकेशन यह थी

02:37

कि अगर इन बैंक्स को नेशनलाइज़ किया जाएगा

02:39

तो यह बैंक्स देश के कोने-कोने तक पहुंच

02:41

सकते हैं और देश के गरीब से गरीब नागरिक

02:43

को अपनी सर्विसेज प्रोवाइड कर सकते हैं।

02:46

जो कि एक फॉर प्रॉफिट कंपनी शायद कभी ना

02:49

करे क्योंकि वो अपने प्रॉफिट की सोचती है।

02:51

बेसिकली सोशलिज्म वर्सेस कैपिटलिज्म वाली

02:53

बात है उन दोनों के जो एडवांटेजेस

02:55

डिसएडवांटेजेस होते हैं। लेकिन ऑब्वियसली

02:57

जैसा मैंने आपको बताया बैंक्स के शेयर

02:59

होल्डर्स तो बिल्कुल भी खुश नहीं होएंगे

03:01

ऐसे डिसीजन से। तो उस टाइम पर एक बैंक था

03:03

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया। उसके एक शेयर

03:05

होल्डर थे आरसी कूपर नाम से। वो सुप्रीम

03:08

कोर्ट में चले जाते हैं इस डिसीजन को

03:10

लेकर। और सुप्रीम कोर्ट में उन्हें छोटी

03:12

सी जीत हासिल होती है। कोर्ट डिक्लेअर

03:14

करता है कि ये जो लॉ है सरकार ने बनाया है

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ये डिस्क्रिमिनेट करता है इन 14 बैंकों के

03:19

खिलाफ जिन्हें नेशनलाइज किया जा रहा है।

03:21

और ये शेयरहोल्डर्स के लिए काफी अनफेयर

03:23

है। तो सरकार की ऑर्डिनेंस को रिजेक्ट कर

03:26

दिया जाता है कोर्ट के द्वारा। और यहां से

03:28

शुरू होती है दोस्तों इंदिरा गांधी सरकार

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