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बर्फ की चादर | Hindi Kahani | Latest Hindi Stories | Hindi Kahani | Koo Koo TV Hindi
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Dificuldade
Legendas (415 segmentos)
[संगीत]
[प्रशंसा]
[संगीत]
[प्रशंसा]
[संगीत]
यह कहानी है माधव नगर के राघव की राघव
ठंडियों में चादर बेचे का कम क्या करता था
राघव की चादर ठंडियों में ही बिका करते और
बाकी के महीने राघव को व्यापार में घाट
हुआ करता था जब-जब गर्मियों का मौसम आता
है हमेशा मुझे ऐसी ही तकलीफें होती हैं ना
कोई चादर बिकती है ना कोई समाज पिताजी
आपको बेचे ही क्यों है मेरे साथ घर पर
वक्त गुजर कीजिए ना अगर मैं तुम्हारे साथ
घर में वक्त गुजरेगा तो हमारे घर खाना
कैसे बनेगा बेटा राघव सोचते हुए अपने घर
से गांव की तरफ चला जाता है और वहां जाकर
देखा है की है भगवान इतनी गर्मी है गर्मी
का महीना आने को अभी 15 दिन और है उससे
पहले ही इतनी गर्मी पता नहीं आगे क्या
होगा
[संगीत]
कहानी ऐसा ना हो की कोई प्यार से अपने
प्लेन ही ताकते सच कहा राघव भैया आपने कुछ
ना कुछ तो गांव की सुरक्षा के लिए सोचना
ही होगा और तो और हमारे गांव के पशु भी
पानी के बिना प्यास र रहे हैं मेरे घर पर
थोड़ा सा पानी रखा हुआ है मैं उन पशुओं को
पीला देता हूं उससे कम से कम उनकी दुआएं
तो लगेंगे राघव घर जाकर अपने घर से एक
बाल्टी पानी लेकर गांव के कुछ प्यास पशुओं
को पिलाता है जिसे देख राघव की बेटी रम्य
उससे कहती है
मैं तो बर्फ से ही सर कम करती
[संगीत]
पिताजी एक बार आपने ही कहा था की अगर कुछ
छान लो तो सब कुछ मुमकिन हो जाता है
[संगीत]
राघव अपने गांव से बाहर चला जाता है और
वहां जाकर देखा है की उसे गांव का सरपंच
पानी बीच रहा है
आओ आओ ले लो ठंडा ठंडा पानी खरीद लो इस
बेहाल गर्मी में अपनी प्यास बुझाओ ए जो ए
जो अरे सरपंच साहब अब बड़ा अच्छा कम कर
रहे हैं लेकिन आपके पास पानी कहां से ए
रहा है तमाम खाओ ना क्यों जिन रहे हो अब
मुझे भी दो ठंडा बोतल पानी दे दीजिए मेरी
बच्ची इस चीज से बड़ी खुश होगी राघव सरपंच
के यहां से पानी लेकर अपने घर जाता है और
सब बड़े चो से पानी पीते हैं तब उनके घर
उनके गांव की महिला आकर कहती है सब
ठंडा-ठंडा पानी पी रहे हैं
[संगीत]
घर में शरबत पिया करते थे अब पानी पी रहे
हैं
[संगीत]
कहां से ठंडा पानी बीच रहे हैं उन्हें
पानी बेचे देख मेरा तो जी ही घबरा रहा है
है लेकिन वह भलाई का कम कर रहे हैं ना अगर
भलाई का कम है तो रुपए क्यों ले रहे हैं
वो कहते हैं ना घोड़ा अगर घास से दोस्ती
करेगा तो खाएगा क्या और आज तो मैं भी उनके
पास नौकरी मांगने जा रहा हूं घर में कुछ
तो आना जाएगा
राघव सरपंच के पास नौकरी मांग में चला
जाता है उसे वक्त सरपंच और उसके पत्नी घर
के आंगन में खड़े होकर बातें कर रहे थे
सुन रहे हो ना भाग्यवान कुछ दिन और गांव
वालों को ल कर हम मालामाल हो जाएंगे मैं
तो सोच भी नहीं शक्ति की उसे बकरी के
श्राप की वजह से हमें इतना मुनाफा हो रहा
है
[संगीत]
उसे बर्फ की खदान में रखोगी तब तक हमें
ऐसे ही बर्फ मिलता रहेगा घर के पास खड़ा
राघव साड़ी बातें सुनकर डांग र गया मैंने
सरपंच जी को भगवान का रूप समझा था लेकिन
यह तो पूरे के पूरे दोनों निकले मुझे यह
सर माजरा समझना पड़ेगा
आखिर ये बर्फ की खदान है क्या अगले दिन के
सुबह होते ही राघव सरपंच जी का पीछा करने
लगा और देखा की सरपंच एक जंगल से होता हुआ
एक बड़ी सी गुफा की तरफ जा रहा है जहां से
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