The video owner has disabled playback on external websites.
This video is no longer available on YouTube.
This video cannot be played right now.
Watch on YouTube
How did British Empire take over India? | Fall of Mughal Empire | Dhruv Rathee
学習統計
CEFRレベル
難易度
字幕 (684 セグメント)
नमस्कार दोस्तों, साल 1686 ब्रिटिश ईस्ट
इंडिया कंपनी मुगल एंपायर के खिलाफ जंग
छेड़ देती है। उस वक्त गद्दी पर बैठे थे
औरंगजेब और इस जंग को एक बहुत बड़ी
बेवकूफी बताया जाता है क्योंकि ईस्ट
इंडिया कंपनी की आर्मी मुगलों की आर्मी के
कंपैरिजन में बहुत कमजोर थी, छोटी थी। तो
यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि बहुत ही
आसानी से मुगलों ने ईस्ट इंडिया कंपनी को
हरा दिया। इंडिया में मौजूद कंपनी की
फैक्ट्रीज को जब्त कर लिया गया। ढेर सारे
एआईसी के ऑफिशियल्स को अरेस्ट कर लिया गया
और जो गवर्नर थे कंपनी के उस वक्त उन्हें
घुटने टेकने पड़े औरंगजेब के सामने। इसके
बावजूद भी करीब 300 सालों बाद ईस्ट इंडिया
कंपनी ने इस एक फॉरेन कंपनी ने पूरे
इंडियन सबकॉन्टिनेंट पर अपना कब्ज़ा जमा
लिया। आज जितनी भी बड़ी से बड़ी कंपनीज़
आपके दिमाग में आती है। Apple, Google,
Facebook ये ईस्ट इंडिया कंपनी इन सारी
कंपनी से ज्यादा बड़ी बन गई थी और ज्यादा
ताकतवर भी। कैसे पॉसिबल हो पाया यह? आइए
समझने की कोशिश करते हैं आज के इस वीडियो
में।
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द कंपनी दैट
रूल्ड इंडिया इन अ लार्ज पार्ट ऑफ द
इंडियन सबक्टिनेंट [संगीत]
डिस्ट्रूटिंग
एक्सपोशन
ब्रिटिश वाल्टीशनल
सेट टू ट्रेड्स
टू टेक लैंड टू वेट वॉर [संगीत]
पीस
हमारी कहानी की शुरुआत होती है दोस्तों
साल 1600 में जब ईस्ट इंडिया कंपनी की
स्थापना करी जाती है कुछ मर्चेंट्स के
द्वारा। यह एक जॉइंट स्टॉक कंपनी थी यानी
इसका बिजनेस शेयर होल्डर्स के द्वारा ओन
किया जाता था और शुरुआत में इसके सिर्फ
125 शेयर होल्डर्स थे। इन्होंने साथ में
मिलकर 70000 पाउंड्स रेज की एस कैपिटल। इस
कंपनी को बनाने के पीछे मकसद था मसालों की
ट्रेडिंग करना। स्पाइसेस में ट्रेडिंग
करना साउथ ईस्ट एशिया के स्पाइस आइलैंड्स
में जाकर। अगले साल 1601 में ईस्ट इंडिया
कंपनी अपने पहले सफर पर निकलती है और
इंडोनेशिया में जाकर दो फैक्ट्रीज सेटअप
करती है। उस जमाने में इंडोनेशिया के इन
आइलैंड्स पर ऑलरेडी स्पेनिश और पोर्चुगीज़
ट्रेडर्स काम करने लग रहे थे। साथ ही साथ
डच ट्रेडर्स ने भी रिसेंटली उसी रीजन में
ट्रेडिंग शुरू करी थी। यह डच कंपनी
इंग्लिश कंपनी के कंपैरिजन में ज्यादा
प्रॉफिटेबल निकलती है। इनके पास ज्यादा
पैसा होता है और बेहतर आर्मी भी होती है।
समय के साथ-साथ यह उस एरिया में डोमिनेंट
पावर बन जाते हैं और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया
कंपनी रियलाइज करती है कि हमें अपना धंधा
कहीं और करना पड़ेगा। इन डच लोगों ने
हमारे लिए कोई जगह नहीं छोड़ी।
कॉन्फ्लिक्ट अवॉइड करने के लिए यह और
जगहें ढूंढते हैं और इनकी नजर इंडिया पर
पड़ती है। इंडिया में भी बहुत से स्पाइसेस
और टेक्सटाइल्स थी। तो साल 1608 में इआईसी
के मर्चेंट्स इंडिया पहुंचते हैं और लैंड
करते हैं आज के दिन के गुजरात में सूरत
शहर पर। देश पर मुगलों का राज था और
मुगलों की जो आर्मी थी 4 मिलियन आर्म्ड
लोगों की आर्मी थी। बहुत ही ताकतवर थी।
कंपनी के ऑफिशियल्स जानते थे कि इनसे
लड़ने का कोई फायदा नहीं है यहां पर।
दोस्ती बनाने की कोशिश करते हैं ताकि ये
लोग हमें यहां पर ट्रेडिंग करने दें। जो
भी यहां पर लोकल महाराजा शहंशाह मौजूद है
उसे थोड़ा अपीस करने की कोशिश करते हैं।
तो उस जहाज के जो कैप्टन थे कैप्टन विलियम
हॉकिंस वो जहाज से उतरते हैं और एक बड़ा
लंबा सफर तय करते हैं आगरा तक जो कि
मुगलों की कैपिटल थी उस वक्त। वहां
पहुंचकर वो मिलते हैं मुगल एपरर जहांगीर
से। बात करने की कोशिश करते हैं कि प्लीज
हमें परमिशन दे दो फैक्ट्री सेटअप करने
की। हम भी ट्रेडिंग करना चाहते हैं सूरत
में। लेकिन जहांगीर इस परमिशन को देने से
मना कर देते हैं। इसके पीछे एक सिंपल रीजन
यह था कि सूरत में उस वक्त पोर्चुगीज़
ट्रेडर्स मौजूद थे और पोर्चुगीज़ ट्रेडर्स
के अच्छे रिलेशंस थे मुगलों के साथ। तो
कोई रीज़न नहीं था जहांगीर के लिए उनके
कॉम्पिटिट इंग्लिश ब्रिटिश लोगों को जगह
दे यहां पर। तो ईआईसी के ऑफिशियल सोचते
हैं कि मुगल टेरिटरी में हमें जगह नहीं
मिल पाई। तो इंडिया के किसी और हिस्से में
जाकर कोशिश करते हैं जहां पर इनकी टेरिटरी
नहीं हो। जहां पर किसी और राजा का शासन
हो। साल 161 में इनकी ये कोशिश सक्सेसफुल
प्रूव होती है जब आंध्र प्रदेश के
मछलीपट्टनम में अपनी ये पहली फैक्ट्री
खड़ी करते हैं। वहां के जो लोकल राजा थे
उन्होंने परमिशन दे दी थी। अगले कुछ सालों
में ईस्ट इंडिया कंपनी और फैक्ट्रीज
एस्टैब्लिश करती है और अपनी पकड़ मजबूत
बनाने की कोशिश करती है इंडियन सबक्टिनेंट
पर। ऐसा करते वक्त कॉन्स्टेंटली
कॉन्फ्लिक्ट की ये सिचुएशन में आ जाते हैं
बाकी और यूरोपियन ट्रेडर्स के साथ। साल
1612 में यह वापस सूरत जाते हैं और वहां
पर पोर्चुगीज़ के खिलाफ जंग छेड़ देते हैं।
बैटल ऑफ स्वाली इसे कहा जाता है और
पोर्चुगीज़ लोग हार जाते हैं। इसके बाद से
पोर्चुगीज़ का जो इन्फ्लुएंस होता है वो
बहुत घट जाता है और मोस्टली गोवा के आसपास
तक रिस्ट्रिक्ट रह जाता है। ईस्ट इंडिया
कंपनी सबसे बड़ी खिलाड़ी बन जाती है इंडियन
सबक्टिनेंट की। इस जीत के कुछ ही टाइम बाद
साल 1615 में ईस्ट इंडिया कंपनी रिक्वेस्ट
करती है इंग्लिश किंग जेम्स वन को कि इस
बारी वह अपनी तरफ से एक रॉयल
रिप्रेजेंटेटिव भेजें मुगल राजा को। अगर
वो कोशिश करेंगे तो शायद इस बारी यह मुगल
शहंशाह मान जाएंगे। तो इंग्लिश क्राउन की
तरफ से सर थॉमस रो को भेजा जाता है जो कि
एक डिप्लोमेट होते हैं। यह वो कर दिखाते
हैं जो हॉकिंस नहीं कर पाए थे। जहांगीर से
जब यह मिलते हैं तो उनको कई बड़े-बड़े
शानदार तोहफे देते हैं और जहांगीर उन
तोहफों को देखकर इंप्रेस हो जाते हैं और
इसीलिए जहांगीर एक शाही फरमान इशू करते
हैं। एक रॉयल ऑर्डर जो कहता है कि इंग्लिश
लोगों को अब परमिशन दी जाती है कि सूरत
में अपनी वो फैक्ट्रीज बना सकें। इतना ही
नहीं कुछ एक्सक्लूसिव राइट्स भी दे दिए
जाते हैं ईस्ट इंडिया कंपनी को कि कुछ-कुछ
टेरिटरीज में सिर्फ ईस्ट इंडिया कंपनी ही
ट्रेडिंग कर सकती है और इसके बदले एक
एनुअल पेमेंट उन्हें देनी पड़ेगी मुगल
शहंशाह को। इसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी की
完全な字幕は動画プレーヤーで利用可能
コメント (0)
ログインしてコメントインタラクティブモード
クイズ
正解:
関連動画
Salman Khan gets fed up with Swami OM - Bigg Boss India | Big Brother Universe
दुनिया की सबसे विश्वसनीय टाइम ट्रैवलर की कहानियाँ | The Most Convincing Time Traveller Story
RRR | Tiger Fight Scene - Jr NTR Entry | Netflix
Pushkar Mela 2025 | पुष्कर मेला पूरी जानकारी| Pushkar fair 2025 Date & Details
जो बात है तुझमें बोल के साथ पूरा गाना | मोहम्मद रफी | ताजमहल 1963 गीत | प्रदीप कुमार
Dhruv Rathee
クイズ
正解:
動画を見ながらクイズが表示されます
覚え方のコツ
この動画より
無料で語学を始める