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B1 Intermediate Hindi 21:43 Educational

Can Humans Ever Leave the Milky Way Galaxy? | The Wormholes Explained | Dhruv Rathee

Dhruv Rathee · 13,992,253 views · Added 1 week ago

Learning Stats

B1

CEFR Level

5/10

Difficulty

Subtitles (538 segments)

00:00

[संगीत]

00:03

नमस्कार दोस्तों, हमारे यूनिवर्स के बारे

00:05

में शायद सबसे कमाल की बात है इसका साइज

00:08

कि यह ब्रह्मांड कितना अनइमिनेबली बड़ा

00:12

है। लेकिन यही बात शायद सबसे निराशाजनक भी

00:15

है। खुद ही सोच कर देखो। अगर आज हम अपने

00:17

पावरफुल टेलिस्कोप्स का इस्तेमाल करके

00:19

धरती जैसा एक और प्लनेट ढूंढ भी लेते हैं

00:22

किसी गैलेक्सी में जो इंसानों के लिए रहने

00:24

लायक हो, वहां तक पहुंचने में सदियां लग

00:26

जाएंगी। इनफैक्ट किसी भी एक इंडिविजुअल

00:29

इंसान के लिए यह गैलेक्सी छोड़कर जाना

00:31

इंपॉसिबल है। आप सब जानते हैं कि धरती

00:33

मिल्की वे गैलेक्सी में है और मिल्की वे

00:35

के जो सबसे करीब गैलेक्सी है वो है

00:38

एंड्रोमीडा गैलेक्सी। अप्रोक्सिममेटली 2.5

00:41

मिलियन लाइट इयर्स दूर है धरती से। तो अगर

00:43

हम एक स्पेसक्राफ्ट का इस्तेमाल करें वहां

00:45

तक जाने के लिए यूजुअल स्पीड होती है एक

00:47

स्पेसक्राफ्ट की 28,000 कि.मी. प्रति

00:50

घंटा। इस स्पीड से वहां तक जाने में 94.5

00:53

बिलियन इयर्स लग जाएंगे। इतना ही नहीं अगर

00:56

किसी तरीके से हम टेक्नोलॉजी बना लेते हैं

00:58

लाइट की स्पीड पर ट्रैवल करने की तो भी

01:01

वहां पर पहुंचने में 2.5 मिलियन इयर्स का

01:04

समय लग जाएगा। यह बात सही मायनों में

01:07

निराश कर देने वाली है। आखिर क्या तुक बना

01:09

यह सारे प्लनेट्स ढूंढने का जब हम वहां पर

01:11

कभी ट्रैवल ही नहीं कर पाएंगे। लेकिन अगर

01:14

एक शॉर्टकट रास्ता हो गैलेक्सी के बाहर तक

01:16

ट्रैवल करने का। एक ऐसा शॉर्टकट जिसके

01:19

जरिए हम यह मिलियन लाइट इयर्स का सफर कुछ

01:22

महीनों में ही तय कर लें। तब यह बातें

01:24

जरूर दिलचस्प बन जाती है। यह शॉर्टकट्स

01:27

हैं दोस्तों वार्म

01:29

[संगीत]

01:35

होल्स। साल 2014 की फिल्म इंटरस्टेलर मेरी

01:38

फेवरेट स्पेस फिल्म एक बार फिर से मैं

01:40

यहां इसका मेंशन करना चाहूंगा। इस फिल्म

01:42

में दिखाया गया है कि कूपर और उनकी टीम जब

01:45

धरती छोड़कर निकलती है और हैबिटेबल

01:47

प्लेनेट्स की तलाश में। धरती जैसे ही और

01:49

प्लेनेट्स की खोज में तो वह दूसरी

01:51

गैलेक्सी में ट्रैवल करते हैं। अपनी

01:53

गैलेक्सी से दूसरी गैलेक्सी में वो

01:55

पहुंचते हैं एक वार्म होल के जरिए कुछ ही

01:58

मिनटों के अंदर। यह फिल्म का वो सीन है जब

02:01

कूपर की टीम वार्म होल से गुजरती है।

02:03

फिल्म के अनुसार इस वार्म होल को डिस्कवर

02:05

किया गया था सैटर्न के ऑर्बिट के पास नासा

02:08

के द्वारा। इसे फिल्म में कई बार मेंशन

02:10

किया जाता है क्योंकि आगे चलकर यह फिल्म

02:11

के प्लॉट में एक बड़ा इंपॉर्टेंट रोल

02:13

निभाता है। लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है

02:15

कि वार्म होल्स का यह कांसेप्ट कोई साइंस

02:18

फिक्शन नहीं है बल्कि असल साइंस पर बेस्ड

02:20

है। क्या होते हैं वार्म होल्स एक्जेक्टली

02:22

और कैसे हम इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। यह

02:25

सब समझने से पहले हमें वापस आना पड़ेगा

02:28

आइंस्टाइन की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी पर।

02:30

इसकी बात मैंने ब्लैक होल्स वाले वीडियो

02:32

में भी करी थी और बेसिक कांसेप्ट भी समझा

02:34

दिया था उस वीडियो में। अब थोड़ा और डीप

02:36

चलते हैं इसके अंदर। जब अल्बर्ट आइंस्टाइन

02:39

ने अपनी थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी लिखी तो इसे

02:41

एक सेट ऑफ इक्वेशंस में लिखा था। इन

02:44

इक्वेशंस के सेट को आइंस्टाइन फील्ड

02:46

इक्वेशंस करके पुकारा जाता है। पहली बार

02:48

इन्हें पब्लिकली रिवील किया गया था 25

02:50

नवंबर साल 1915 में जब आइंस्टाइन ने अपना

02:53

पेपर सबमिट किया था टू द प्रशियन एकेडमी

02:56

ऑफ़ साइंसेस बर्लिन जर्मनी में। टोटल में

02:58

ये फील्ड इक्वेशंस 10 अलग-अलग इक्वेशन से

03:01

बनती हैं। 10 नॉन लीनियर पार्शियल

03:03

डिफरेंशियल इक्वेशंस। लेकिन इन्हें शॉर्ट

03:05

में एक इक्वेशन से भी रिप्रेजेंट किया जा

03:08

सकता है। और वो एक इक्वेशन कुछ ऐसी दिखती

03:11

है। कैपिटल g म्यू + लैम्ब्डा छोटा g म्यू

03:15

=

03:17

8πg / c द पावर 4 और t मμ चिंता मत कीजिए

03:22

इस वीडियो में हम मैथमेटिकल डिटेल्स में

03:24

नहीं जाएंगे क्योंकि इस एक इक्वेशन के

03:26

अंदर बहुत बहुत ज्यादा कॉम्प्लेक्सिटी है।

03:29

अगर इसे एक्सपैंड करते हो इस एक इक्वेशन

03:31

को तो देखो कैसी ये स्टेप्स दिखती हैं।

03:33

अगर आप मैथ्स से प्यार भी करते हो, तो भी

03:35

आपका सर चकरा जाएगा यह देखकर। मोटे-मोटे

03:37

तौर पर यह इक्वेशंस हमें बताती हैं कि

03:39

मैटर और एनर्जी कैसे स्पेस टाइम के

03:42

कर्वेचर को इन्फ्लुएंस करते हैं। अल्बर्ट

03:44

आइंस्टाइन ने कहा था इस चीज को विजुअलाइज

03:46

करने के लिए इमेजिन करो एक बड़ा सा मेश

03:48

है। इस मेश के ऊपर जब आप ऑब्जेक्ट्स रखते

03:50

हो, यह वजन से नीचे बेंड डाउन हो जाता है।

03:53

जो स्पेस टाइम का मेश है, वो भी कुछ इसी

03:55

तरीके से बेंड हो जाता है। कर्व हो जाता

03:57

है। बड़े-बड़े प्लनेट्स और स्टार्स के वजन

04:00

से। जितना ज्यादा ग्रेविटेशनल फोर्स होगा

04:02

किसी प्लनेटरी ऑब्जेक्ट का उतना ही ज्यादा

04:05

यह स्पेस टाइम का मेश कर्व हो जाएगा उनके

04:07

अराउंड। अब इंटरेस्टिंग बात यह है कि

04:09

अल्बर्ट आइंस्टाइन खुद से अपनी फील्ड

04:11

इक्वेशंस को पूरी तरीके से सॉल्व नहीं कर

04:13

पाए थे। उन्होंने बस एक अप्रोक्समेट

04:15

सॉल्यूशन निकाला था अपनी इक्वेशन का एक

04:17

स्पेसिफिक केस में। पहले इंसान जिन्होंने

04:20

इन फील्ड इक्वेशंस को सॉल्व किया था वो थे

04:22

कार्ल श्वथ्स चाइल्ड साल 1916 में।

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